Monday, March 16, 2015

सपने

सपने है... हथेलियों मे रखें है...

नाज़ुक है... कांच जैसे...

उंगलियों से संभाला है...

जगह सारी खुरदुरी है...

खिरचें न आ जाए... डर लगता है...

बहुत संभाल के रखा है...दिल के मरतबान मे...के कही गीर न जाए...फिसल न जाए ... उंगलियों के बीच से....

RiTti :)

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