Thursday, August 11, 2011

अब क्या कहें.... !!

कल काफी देर तक जलता रहा उस घर का दीया ...

जहाँ हर रोज़ शाम ढलते ही अन्धेरा हो जाता था...

बहुत अरसे बाद देखने को मिला था लोगो का हुजूम उस घर क आँगन में,

कल देखा तो लगा कि मौत भी कितना  खुशकिस्मत बनाती है इंसा को...,

के जीतेजी... जिससे ना मिलने आता था कोई...उसके मरने पे पूरा का पूरा कुनबा मौजूद था....

Monday, August 8, 2011

कुछ अधूरा सा !!

एक रात है अधूरी सी एक बात है अधूरी सी......

कुछ शब्द हैं अधूरे से, कुछ नज़्म है आधे-पुरे से ...

कुछ अदला-बदली बातों की,

कुछ जान पहचान आदतों की,


कुछ पसंद नापसंद गानों की,

कुछ बात उस रोज़ के किस्सों की,.................

कुछ सवाल आज भी अधूरे हैं,कुछ जवाब आज भी अधूरे हैं...

वो "बात" आज भी अधूरी है, 

वो "रात" आज भी अधूरी है... :)