कल काफी देर तक जलता रहा उस घर का दीया ...
जहाँ हर रोज़ शाम ढलते ही अन्धेरा हो जाता था...
बहुत अरसे बाद देखने को मिला था लोगो का हुजूम उस घर क आँगन में,
कल देखा तो लगा कि मौत भी कितना खुशकिस्मत बनाती है इंसा को...,
के जीतेजी... जिससे ना मिलने आता था कोई...उसके मरने पे पूरा का पूरा कुनबा मौजूद था....