Friday, November 7, 2014

..पीले  फूल....

पीले  फूल - याद है ना ??

पीले फूल बोहोत पसंद है मुझे,
रास्तों के किनारे पेड़ों पे गुच्छे से लटकते हुए पीले फूल,

पता है ना तुम्हें, याद है?
बताया था एक बार..... बातों  बातों में,

वो रास्ता भी दिखाया था.... जहाँ कतारें लगी है इनकी..
कितना सुकून मिलता है इन्हें देख कर...

ऐसा लगता है .... मानों वो पेड़ भी ख़ुशी से ख़ुद पे ओढ़े हुए हैं इनकी चादर

मौसम के ख़ुश होने का एहसास दिलाते हैं ये पेड़ो पे लगे हुए ढेरों पीले फूल...

रास्तों पर बिखरे हुए सूखे पत्ते और पीले फूल....
बोहोत पसंद है मुझे....

बताया था तुम्हें , याद है ना ??

एक बार कभी शायद Drive पे...
कहा था तुमने मुझसे .... जब अकेली होगी .... मन ठीक नहीं होगा लगेगा कोई नहीं है.... बस एक फ़ोन करना ....आ जाऊँगा ...ले चलूँगा घुमाने ....दिखाने ...पीले फूल ..

याद है ना.... कहा था तुमने ??

आज मन कुछ ठीक नहीं है...

 ले चलोगे ,,,,घुमाने दिखाने ,,,,पीले फूल ???


Ritti... :)

Thursday, November 6, 2014

सब से ख़ास

बारिश की एक शाम..


मिट्टी  की खुश्बू.... घर का आँगन.... अंगीठी से निकलता सौंधा सौंधा धुँआ .... और तुम...  सफ़ेद कुर्ते में...  
हाथ में कागज़ों का बंडल लिए कुछ सोचते हुए .... कुछ लिखते हुए....
कभी नाक पर उतरते ऐनक को ऊपर सरकाते तो कभी चाय की चुस्की लगाते....अपने ही लेख में गुम....

....और मैं... तुम्हारे  ठीक सामने रोलिंग चेयर पे चाय पीती हुई .. सिर्फ तुम्हे देखती और बस देखती रहती.....
तुम्हारे व्यक्तित्व के हर एक बात में सराबोर ,खोई हुई,  इंतज़ार करती के कब वो लेख पूरा होगा... और तुम्हारा ध्यान मुझपे आएगा,....

तुम वो कागज़ों का बंडल टेबल पर रखते ,, फिर कहते Ritti  पढ़ो तो ज़रा,,
 बताओ तो कैसा लगा तुम्हे...??

"ऐसे तो हमेशा  से ही बोहोत attention 
मिलता रहा है मुझे तुमसे,, पर लेख ख़त्म होने का हमेशा से कुछ ज्यादा ही इंतज़ार रहता था"

क्यूँकि,  तुम्हारा लेख सब से पहले ..मुझे जो.. पढ़ने को मिलता था,,

 ये किसी अवॉर्ड जितने से कम नहीं रहा मेरे लिए....

मैं हाथ में तुम्हारा लेख लिए.... तुम्हारे सोच को शब्दों में देख कर बस गुम हो जाती ,..
सोचती.... के ....  इतनी आसानी से कोई अपनी सोच को कैसे शब्द दे सकता है,,, 
और तुम सब .. जान-समझ कर भी अंजान.....मुस्कराकर एक और चाय की demand करते...

  ...आज भी सब से पहले मै ही पढती हु तुम्हारे सारे लेख......बस अंतर इतना है कि तुम्हे सामने नहीं देख सकती...

Reason: ...तुम्हारे लिखावट की जगह 'MS Word'  के '' 'FONTS'  ने ले ली है और काग़ज़ों की जगह 'MAILS'  ने,,

वैसे आज भी ज्यादा कुछ  बदला नहीं है…

 कम से कम मेरे लिए तो नहीं....

मेरे लिए तो,,, तुम आज भी वही हो,,,

सब से ख़ास....

RiTti :)