कितना अच्छा होता न Feelings भी Automatic होते तो...
Feel करना हो करो ...न करना हो... न करो...
सोच बड़ी चीज है... ऐसा बोलते है... इतनी बड़ी के खत्म ही नही होती...
कितना मुश्किल है न ..मन को समझाना... सोच पे लगाम लगाना..
कितना भी सोच लो Supply खत्म नही होता...भले ही Demand हो या न हो...
हर दिन वही Zero से Start till Infinities...
समझ ही नही आता कहाँ रूक जाना है... और इत्फाकन ... ग़र समझ आ भी जाए... तो भी रोका कैसे जाय...
सवाल बडा है.. जवाब किसी के पास नही....
...और फिर वही... कभी इस करवट... कभी उस करवट...
पुरी रात आखों आखों मे....
निंद तो जैसे Out of Stock हो....
कभी गानें सुनना ... कभी किताबें पढना...
फिर भी "सोचना" खत्म नही होता... Side by Side चलता रहता है...
काश के मन का भी कोई Switch Board होता.... के जब सोचना हो ..ON किया.. और जब सोना हो... तो OFF...
System होना चाहिए....
...के जब Feel करना हो.. याद करना हो.. रोना हो.. खुश होना हो.... तो Feel किया, याद किया, रोया और खुश भी हो लिये..
वो भी..अपनी सहुलियत से...
सब का Timer अपने हाथ मे..
सब कुछ कितना आसान होता.....
....
काश.... के मन का भी कोई Switch Board होता...
RiTti :)